Sunday, March 6, 2011

अंतर्विरोध

१:
श्वेत के साथ हुआ
कृष्ण का प्रादुर्भाव ;
जीवन के साथ मौत का ,
स्वागत के साथ विदा का ;

'असत्य' का होना भी
उतना ही सत्य है,
जितना कि सत्य का होना ;

इस तरह
कुछ भी नहीं रह जाता
दुनिया का सत्य ;
शाश्वत हैं तो केवल
अंतर्विरोध ,
जिनके बूते
बनती है दुनिया
बदलती है ,
और फिर से चलती है |

२:
'साहसी बनना'/ बन के रह गया था
दुनिया का सबसे बड़ा षड़यंत्र;

बेहतर था
बतियाना साहसिक कारनामे,
सोचना - विचारना,
और उपदेश देकर बन जाना बुद्धिजीवी ;
परन्तु जैसे ही आपने चाहा साहसी बनना
वैसे ही नकार दिया गया
दुस्साहसी कहकर |

३:
अस्वीकार्य था उन्हें
अपने अस्तित्व के चारों ओर
किसी छाया का भी दिखना ;
तब कैसे स्वीकार्य होता
स्वेच्छा से अपने अस्तित्व का खात्मा ;
इस तरह
'ह्रदय-परिवर्तन' बन गया था
दुनिया का एक भद्दा मज़ाक |
वां वो गुरुरे-इज्जों-नाज़ यां यह हिजाबे-पास वज़अ
राह में हम मिलें कहाँ, बज़्म में वो बुलाये क्यों
(साभार - ग़ालिब )